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लेखनी कहानी -29-Nov-2022

कॉलेज की यादें

वो गलियाँ भुलाई नहीं जाती जिसमें बसी हैं, कॉलेज की यादें
कभी मन को गुदगुदाती, तो कभी किसी की याद दिलाती वो बातें।

मन दर्पण में बसा लिया है, यारों का वो सुन्दर मेल
घंटो बैठ तले नीम के बाते करते थे हम ढेर।

याद आई फिर वो पुस्तकालय की शान्त शान्त दीवारें,
पुस्तकों में कुछ खोए हुए, कुछ तल्लीन वो मूक किनारे।

शिक्षकों की गाथा सुनाती, खाली पड़ी वो कुर्सी-मेज
जिन पर बैठ-बैठ कर करते दोस्तों संग मस्ती के खेल।

याद आया आज फिर वो खेल का बड़ा सा मैदान,
मानो कह रहा हो आओ खेलो खेल तुम कदरदान ।

याद आया कॉलेज में बिताया हर एक लम्हा, हर एक दिन
न कोई चिंता, न कोई फिक्र ,बस पंछी की भांति उड़ान भरते हम मोहसिन। 

श्वेता दूहन देशवाल मुरादाबाद उत्तर प्रदेश
#यादों के झरोखा
#2022

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2 Comments

Arina saif

03-Dec-2022 06:29 PM

Nice

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Abhinav ji

03-Dec-2022 07:47 AM

Very nice👍👍

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